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SGB क्या है? SGB में कैसे इन्वेस्ट करते हैं? – What is SGB? How to Invest in SGB

04 April 2022

SGB का फुल फॉर्म है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, जो की सरकार द्वारा इशू किया जाता है, जिन्हें सोने के ग्राम में वैल्यू किया जाता है।  यह फिजिकल सोना रखने का विकल्प (अल्टरनेटिव) है। बॉन्ड भारत सरकार की ओर से रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया जाता है और बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL), चुनिंदा डाकघरों (पोस्ट ऑफिसेस), नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के माध्यम से बेचा जाता है।

SGB के विशेस्ताएं

  • ज़ीरो रिस्क – स्टोरेज का खर्चा कम है

SGB को सरकारी गारंटी प्राप्त है, इसलिए इसमें इन्वेस्ट करने पर जीरो रिस्क है।

फिजिकल सोना के अधिक स्टोरेज कॉस्ट की चिंता को खत्म करने के लिए, एसजीबी पेपर और डीमैट फॉर्मेट में उपलब्ध है। जब आप SGB में इन्वेस्ट करते हैं, तो आपको फिजिकल गोल्ड नहीं बल्कि होल्डिंग सर्टिफिकेट मिलता है।

इसका मतलब यह है कि आपको सोने की सुरक्षा के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, या इसे बैंक लॉकर में रखने के लिए एनुअल फी पे करने की आवश्यकता नहीं है। सर्टिफिकेट आपके नाम पर होगा और चोरी होने का कोई जोखिम नहीं होगा। 

फिजिकल सोना हैंडल करने के तुलना में इसमें जीरो रिस्क है।

  • सॉवरेन गारंटी 

सॉवरेन गारंटी एक सरकार की गारंटी है, जिसमे पैमेंट करने की प्राथमिक जिम्मेदारी रखने वाली संस्था या एंटिटी, यदि दायित्व पूरा नहीं करता है तो वैसे में सरकार उस दायित्व को पूरा करने की एंटिटी लती है। इस वजह से SGB में इन्वेस्ट किया गया पैसा सुरक्षित है। 

  • शुद्धता (प्यूरिटी) का आश्वासन

सोने का दाम RBI द्वारा फिक्स किया जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल ट्रांजक्शन (लेन-देन) में विस्तार के कारण SGB में इन्वेस्ट करना आसान हो गया है।  इसी कारण से यहाँ हम SGB भारत में ऑनलाइन कैसे खरीदें, इस बारे में चर्चा करेंगे।  

SGB भारत में ऑनलाइन कैसे खरीदें?

बहुत सारे बैंक्स अपने वेबसाइट पर, इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से, ऑनलाइन SGB खरीदने का ऑप्शंस देते हैं, और इनको खरीदने का तरीका अक्सर एक जैसा है। उधारण के तौर पे, SBI ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से SGB खरीदने का तरीका नीचे दिया गया है।

एसबीआई ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदने के लिए आप इन स्टेप्स को फॉलो करें :-

स्टेप 1. सबसे पहले स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के वेबसाइट पर जा कर अपने नेट बैंकिंग अकाउंट में लौग इन करें। 

स्टेप 2.  इसके बाद ‘eServices’ ऑप्शन (विकल्प) चुने और इसके अंदर ‘Sovereign Gold Bond’ पे क्लिक करें।  

स्टेप 3. यहाँ पर, उन नियमों और शर्तों को पढ़ें, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लागु की गई हैं। इन नियमों और शर्तों से अच्छी तरह वाकिफ होने पर, ‘proceed’ विकल्प पर क्लिक करें। 

स्टेप 4. अब आप रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें और पूरा होने पर ‘Submit’ बटन पर क्लीक्ल करें। 

स्टेप 5. यहाँ पर, आपको अपने नॉमिनी का डिटेल्स परचेस फॉर्म में भरने के अलावा, आप कितने ग्राम खरीदना चाहते हैं यह भी भरना पड़ेगा।  

स्टेप 6. परचेस फॉर्म में इन सारे डिटेल्स भरने के बाद ‘Submit’ पर क्लिक करें। 

SGB के लिए कौन अप्लाई कर सकता है?

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के नियम के अनुसार नीचे दिए गए व्यक्ति/ संस्थाएं SGB के लिए अप्लाई कर सकतें हैं।

  • व्यक्ति जो भारत का निवासी है।
  • एक हिंदू अविभाजित (undivided) परिवार (HUDF)
  • नाबालिग (माइनर) की ओर से खरीदने वाले व्यक्ति
  • चैरिटेबल संगठन (organizations), ट्रस्ट और विश्वविद्यालय (Universities)

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया, RBI, भारत सरकार की तरफ से, SGB अलग-अलग हिस्सों में इशू करता है । 

SGB के कुछ सबसे महत्वपूर्ण फायदे और नुकसान 

फायदे

  • इंटरेस्ट पेमेंट 

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना के सबसे बड़े लाभों में से एक, इंटरेस्ट पेमेंट है। सरकार आपके SGB इन्वेस्टमेंट पर 2.5% के रेट से फिक्स्ड एनुअल इंटरेस्ट देती है । यह इंटरेस्ट पेमेंट दो भागों में बांटा गया है और इन्वेस्टर को हर 6 महीने में पेमेंट किया जाता है।

चाहे सोने की कीमत बढ़े या गिरे, आपको इंटरेस्ट फिक्स्ड  रेट से मिलने की गारंटी है।

  • सॉवरेन गारंटी 

रिडीम किये गए अमाउंट पर और इंटरेस्ट, दोनों पर सॉवरेन गारंटी (सरकार द्वारा दिए जाने वाला गारंटी) मिलता है।

  • पेपर और डीमैट (DEMAT) फॉर्मेट

फिजिकल सोने के स्टोरेज कॉस्ट और चिंता को खत्म करने के लिए, एसजीबी पेपर और डीमैट फॉर्मेट में उपलब्ध है। जब आप SGB में इन्वेस्ट करते हैं, तो आपको फिजिकल गोल्ड नहीं बल्कि होल्डिंग सर्टिफिकेट मिलता है।

इसका मतलब यह है कि आपको सोने की सुरक्षा के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, या इसे बैंक लॉकर में रखने के लिए एनुअल फी पे करने की आवश्यकता नहीं है। सर्टिफिकेट आपके नाम पर होगा और चोरी होने का कोई जोखिम नहीं होगा। 

फिजिकल सोना हैंडल करने के तुलना में इसमें ज़ीरो रिस्क है।

  • टैक्स बेनिफिट 

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना पर पाए जाने वाला टैक्स बेनिफिट भी महत्वपूर्ण है। आपके SGB इन्वेस्टमेंट से आपको मिलने वाले इंटरेस्ट पर कोई TDS लागू नहीं होता है।

  • मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड ट्रांसफर और इंडेक्सेशन (Indexation) बेनिफिट

आपको मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड ट्रांसफर करने और इंडेक्सेशन बेनिफिट हासिल करने की भी अनुमति है। अगर आप मैच्योरिटी के बाद बॉन्ड को भुनाते (रिडीम करतें) हैं, तो कैपिटल गेन टैक्स से भी छूट मिलेगी। हालांकि, आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार इंट्रेस्ट पूरी तरह से टैक्सेबल होगा।

  • लोन लेने में आसानी

एसजीबी का उपयोग लोन के लिए कोलैटरल के रूप में किया जा सकता है।

  • शुद्धता (प्यूरिटी) का आश्वासन

सोने का दाम RBI द्वारा फिक्स किया जाता है।

  • स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की जा सकती है

सर्टिफिकेट की ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंज  पर की जा सकती है।

नुकसान

  • लम्बा मैच्योरिटी समय

8 साल का लम्बा मैच्योरिटी समय के कारण बहुत सारे इंवेस्टर्स गोल्ड बॉन्ड में इन्वेस्ट करना नहीं चाहतें हैं। हालांकि, यह लम्बा समय वास्तव में सबसे महत्वपूर्ण गोल्ड बॉन्ड लाभों में से एक है। 5 साल के बाद इजी एग्जिट ऑप्शन है।

सरकार ने सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण इन्वेस्टर्स को होने वाले नुकसान से बचने के लिए समय लम्बा रखा है। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन्वेस्टर्स इन्वेस्टमेंट की तारीख से 5 साल बाद बांड को भुना (रिडीम) सकते हैं।

  • कैपिटल लोस् 

एसजीबी में आपके इन्वेस्टमेंट के कारण कैपिटल लोस् हो सकता है, क्योंकि बॉन्ड वैल्यू सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमत से जुड़ा होता है। यदि आप जिस कीमत पर बांड खरीदते हैं, वह उस कीमत से अधिक है जिस पर आप इसे मैच्योरिटी पर भुनाते (रिडीम करतें) हैं, तो आपको नुकसान हो सकता है।

लेकिन सोना एक महत्वपूर्ण वस्तु है और सरकार लगातार इसकी कीमत को स्थिर रखने के लिए काम करती है। और अगर आप 5-8 साल तक इनवेस्टेड रहेंगे, तो कैपिटल लोस्स की संभावना मिनिमम है। हालाँकि, लोस् की संभावना को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता है।

SGB ​​में इन्वेस्ट करने का मिनिमम और मैक्सिमम लिमिट् क्या हैं?

आरबीआई 1 ग्राम के denominations और उसके मल्टीपल्स (multiples) में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करता है। भारत में ऑनलाइन गोल्ड बॉन्ड खरीदते समय, इन्वेस्टर्स को मिनिमम 1 ग्राम के लिए इन्वेस्ट करना चाहिए।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में, SBI के माध्यम से, इन्वेस्टमेंट का मैक्सिमम  सीमा इस प्रकार है:

  • एक व्यक्ति के लिए 4 किलोग्राम 
  • हिंदू अविभाजित (undivided) परिवार (HUDF) के लिए 4 किलोग्राम 
  • ट्रस्टों के लिए (या एक फाइनेंसियल वर्ष में भारत सरकार द्वारा notified इस तरह के संस्थाओं), 20 किलोग्राम 

इस के आलावा, जॉइंट होल्डिंग के केस में, पहला होल्डर को केवल 04 किलोग्राम मैक्सिमम इन्वेस्टमेंट लिमिट की अनुमति है। 

आरबीआई ऑफ़लाइन मार्गों के माध्यम से भी एसजीबी में इन्वेस्टमेंट की अनुमति देता है। इसके लिए इन्वेस्टर्स नीचे दिए गए  किसी भी संस्था से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीद सकते हैं:

  • सिलेक्टेड डाकघरों (पोस्ट ऑफिसेस)
  • स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL), 
  • नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)  
  • बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) 
  • लिस्टेड कमर्शियल बैंक्स, (प्राइवेट बैंक्स और पब्लिक बैंक्स) 

क्या आपको सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में इन्वेस्ट करना चाहिए?

किसी एक इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के द्वारा हर एक इन्वेस्टर अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता है। लेकिन अगर गोल्ड बॉन्ड टैक्स बेनिफिट, सरकारी गारंटी और इंटरेस्ट पेमेंट को ध्यान में रखा जाये तो, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि SGB में इन्वेस्ट करके पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन (diversification) हासिल करने के सबसे अच्छे तरीकों में से यह एक अच्छा तरीका है।

इन्वेस्ट करने से पहले, सुनिश्चित करें कि आप फायदे के साथ-साथ नुकसान को भी अच्छी तरह से समझते हैं और सही निर्णय लेने के लिए अपनी जरूरतों को होने वाले नुकसानों के साथ मैच करें।

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